Truth of Life !!
सच्चाई के आईने,काले हो गये,
बुजदिलो के घरमेँ,उजाले होगये,
झूठ बाजार में,बेखौफ बिकता रहा ,
मैने सच कहा ते , जान के लाले हो गये,
लहू बेच-बेच कर,जिसने परिवार पाले,
वो भूखा सो गया ,
जब बच्चे कामवाले हो गए,
लहजा मिटा,मिजाज नरम, आंखो मेँ शरम,
सब बेच खाये जब , वो शहर वाले हो गये,
अपनी कमाई से एक,झोपड़ी तक ना बना सके ,
वो सियासत में आये, तो महल वाले हो गए ।।
याद रखिये मर्यादा २खनी बहोत जरूरी हैं,
जब पैसों की कमी हो तो २वर्चा में,
और जब ज्ञान की कमी हो तो चर्चा में ,
मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदलकर देख,
देखना मुझसे भी बुरे हो लोग,
तू घरसे निकलकर तो देख ।।
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